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कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है? जानें तारीख, समय, पूजा मुहूर्त और व्रत विधि

बाल गोपाल श्रीकृष्ण – कृष्ण जन्माष्टमी 2026

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 इस बार शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाई गई। इस लेख में जानिए जन्माष्टमी की तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत विधि और इस पर्व का महत्व।

जी हां मैं बात कर रही हूँ श्री कृष्ण जन्ममहोत्सव की!
यह दिन कृष्ण भक्तों के द्वारा बड़े उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता हैं। मान्यता है कि इसी दिन विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, जिन्होंने बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की पुनर्स्थापना का संदेश दिया। इसलिए जन्माष्टमी का भारतीय संस्कृति में शुरूआत से ही एक अलग महत्व रहा है। हम सालों से जन्माष्टमी माना तो रहे हैं लेकिन क्या इसके पीछे का महत्व जानते हैं?

अगर आपका जवाब नहीं हैं, तो चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं हैं! इस आर्टिकल के जरिए हम बताएँगे जन्माष्टमी क्यों, कब और कैसे मनाई जाती है, और आखिर क्यों यह पर्व कृष्ण भक्तों के लिए इतना खास है,

और साथ ही जानेंगे जन्माष्टमी 2026 की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और दही हांडी उत्सव से जुड़ी जानकारी!

जन्माष्टमी: धर्म, प्रेम और सत्य की राह का संदेश

हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी या गोकुल अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन को लोग उल्लास के साथ मिलकर इसलिए बनाते है क्योंकि लोगों के अनुसार ऐसा माना जाता है की इस दिन कृष्ण अवतार लेकर अन्याय, अधर्म और अपने दुष्ट मामा कंस का अंत करेंगे और सत्य, अच्छाई और धर्म का पुनर्निर्माण करेंगे। साथ ही यह दिन हमें श्री कृष्ण के ज्ञान के कुछ कर्तव्य और कर्म की सीख भी देता है। इस के अलावा इसे मनाने के पीछे की कहानी जो बताई जाती है, वो कुछ ऐसी है- श्री कृष्ण के मामा कंस मथुरा का राजा हुआ करता था, जिसने अपनी बहन देवकी और उनके पति वासुदेव को कारगार में बंदी बना कर रखा था, क्योंकि कंस को ये श्राप था कि उसकी बहन देवकी से जन्मा पुत्र कंस के मृत्यु का कारण बनेगा। तभी भाद्रपद की अष्टमी को देवकी ने विष्णु के आठ वें अवतार कृष्ण को जन्म दिया, ताकि वे कंस के अत्याचार को खत्म कर सके।

कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा विधि:

श्री कृष्ण के त्रिदेवताओं में से एक देवता होने के कारण लोग हर साल जन्माष्टमी पर उनका आशीर्वाद और कृपा पाने के लिए अपनी श्रद्धा अनुसार व्रत रखते हैं। इस दिन व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता है, वहीं कुछ लोग तो इस दिन निर्जला व्रत भी रखते हैं। दिन की शुरुआत स्नान करने के बाद व्रत के संकल्प से होती है। उसके बाद श्रद्धालु श्री कृष्ण की पूजा की तैयारियों में लग जाते हैं। भक्तजन इस दिन अपने-अपने लड्डू गोपाल के साथ झांकियां भी सजाते हैं और उनके भोग के लिए अलग-अलग व्यंजन बनाते हैं जिसमें धनिए की पंजीरी, अजवाइन की पंजीरी, पंचामृत, कान्हा जी का मनपसंद माखन-मिस्री, फल ​​मेवे की मिठाई शामिल होती हैं। जैसे ही मध्य रात्रि का समय होता है, कान्हा जी का विधि-विधान और भजन-कीर्तन के साथ पंचामृत से अभिषेक कर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

दही-हांडी का महत्व:

जन्माष्टमी में सबसे दिलचस्प बात उसके दही हांडी उत्सव होते है। यह महोत्सव खासकर महाराष्ट्र में बड़े उत्साह से मनाई जाती है। वहीं दही हांडी महोत्सव का इतिहास भी कुछ खास है। दही हांडी उत्सव इसलिए मनाई जाती है क्योंकि कहानियों में हमेशा से हम यही सुनते आ रहे हैं कि, बाल रूप कृष्ण बहुत नटखट हुआ करते थे। हर घर में जा-जा कर मटकी में से माखन चोरी कर भाग जाया करते थे। जब सब गोपिया उनकी इस आदत से परेशान हो गई तब उन्होंने मटकियों को ऊपर बांधना शुरू कर दिया। इसके बाद भी श्री कृष्ण ने अपने दोस्तों की मदद से मटकी में से माखन चुरा ही लिया करते थे। इसलिए दही हांडी महोत्सव में ऊंची जगह मटकी को बंदा जाता है और फिर एक-एक कर युवाओं का समूह उत्साह और उमंग के साथ आकर हांडी को फोड़ने की कोशिश करते हैं, अंत में जो समुह हांडी को फोड़ने में सक्षम होता है वे विजेता कहलाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी 2026: तिथि, पूजा मुहूर्त और व्रत पारण का समय

  • जन्माष्टमी: शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
    अष्टमी तिथि आरंभ: 4 सितंबर, रात 2:25 बजे
    अष्टमी तिथि समाप्त: 5 सितंबर, रात 12:13 बजे
    रोहिणी नक्षत्र: 4 सितंबर रात 12:29 से रात 11:04 तक
    निशिता पूजा मुहूर्त: 4 सितंबर रात 11:57 से 5 सितंबर रात 12:43 तक
    व्रत पारण: 5 सितंबर सुबह 6:01 के बाद
    समय नई दिल्ली के अनुसार हैं; आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

स्रोत: द्रिक पंचांग

जन्माष्टमी 2026 शुभकामना संदेश:

अगर आप अपने परिवार और दोस्तों को जन्माष्टमी 2026 की शुभकामनाएं देना चाहते हैं तो उन्हें भेज सकते हैं: “जय श्री कृष्ण! इस जन्माष्टमी कान्हा जी आपके जीवन में सुख-समृद्धि और अपार खुशियां लेकर आएं।” या कह सकते हैं “राधे-राधे! इस पावन पर्व पर कान्हा का आशीर्वाद सदा आप पर बना रहे।” इन्हें व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर स्टेटस और पोस्ट के रूप में शेयर किया जा सकता है।

इस तरह जन्माष्टमी यानी गोकुल अष्टमी सिर्फ भगवान श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश भी देती है। यही वजह है कि इस दिन देशभर में कृष्ण भक्त पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाते हैं।

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