मेडिकल जांच को आसान बनाने और डॉक्टरों की ट्रेनिंग को बेहतर करने के लिए IIT Jodhpur के शोधकर्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स से जुड़ी नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। यहां ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है, जिससे हृदय की अल्ट्रासाउंड जांच में रोबोट मदद कर सकेगा। इसके साथ ही AI मेडिकल स्कैन में पसलियों के फ्रैक्चर की पहचान करने और मेडिकल छात्रों को जटिल प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग देने में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
हार्ट की अल्ट्रासाउंड जांच में मदद करेगा रोबोट
हृदय की अल्ट्रासाउंड जांच यानी इकोकार्डियोग्राफी में सही तस्वीरें लेना काफी अहम होता है। इसके लिए डॉक्टर या तकनीशियन को अनुभव और तकनीकी कौशल की जरूरत पड़ती है। इसी चुनौती को दूर करने के लिए IIT Jodhpur की मेडिकल AI सिस्टम्स लैब (MAISys Lab) AI से नियंत्रित होने वाली रोबोटिक प्रणाली विकसित कर रही है।
इस तकनीक में रोबोट अल्ट्रासाउंड प्रोब को संभालेगा, जबकि AI उसे सही दिशा और स्थिति में रखने में मदद करेगा। AI हर तस्वीर की गुणवत्ता जांचता है और रोबोट को तब तक संकेत देता रहता है, जब तक दिल की सही तस्वीर नहीं मिल जाती। इससे हृदय की जांच के दौरान जरूरी तस्वीरें लेना आसान हो सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, भारत में अपनी तरह का यह पहला प्रयास है।
इस परियोजना में AIIMS जोधपुर के डॉक्टर भी साथ जुड़े हैं और इसे केंद्र सरकार की अनुसंधान संस्था ANRF (पहले SERB) से आर्थिक मदद मिली है। अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो भविष्य में स्वास्थ्यकर्मियों को हृदय की अल्ट्रासाउंड जांच करने में मदद मिल सकती है। खासकर उन इलाकों में इसका फायदा हो सकता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को जांच कराने में परेशानी होती है।
AI स्कैन में पहचानेगा पसलियों के फ्रैक्चर
मेडिकल स्कैन का विश्लेषण करना भी इस शोध का एक अहम हिस्सा है। सीटी स्कैन जैसी जांचों में कई बार छोटी-छोटी बारीकियों को पहचानना और उनका सही आकलन करना समय लेने वाला काम होता है। ऐसे में AI डॉक्टरों को जरूरी जानकारी जल्दी उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
IIT जोधपुर की लैब एजेंटिक AI पर आधारित एक तकनीक विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य मेडिकल स्कैन में पसलियों के अलग-अलग तरह के फ्रैक्चर की पहचान करना और उनसे जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से सामने रखना है।
इससे डॉक्टरों को स्कैन की रिपोर्ट समझने और मरीज के इलाज से जुड़े फैसले लेने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस तकनीक का मकसद डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि जांच और इलाज के दौरान उनके काम को आसान बनाना है।
सिमुलेशन के जरिए मेडिकल छात्रों को मिलेगी ट्रेनिंग
IIT जोधपुर में मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों की ट्रेनिंग को बेहतर बनाने पर भी काम किया जा रहा है। इसके लिए ऐसे इंटरैक्टिव टूल तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी मदद से छात्र सिमुलेशन के जरिए जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं को समझ सकेंगे।
इन टूल्स में क्लिनिकल स्कैनिंग सिमुलेटर और आंखों की सर्जरी से जुड़े वीडियो शामिल हैं। इनकी मदद से विद्यार्थी अलग-अलग परिस्थितियों को समझ सकते हैं और यह देख सकते हैं कि किसी प्रक्रिया में बदलाव करने से क्या असर पड़ता है।
इस तरह की ट्रेनिंग से छात्रों को केवल किताबों के जरिए सीखने के बजाय व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का मौका मिल सकता है। इससे चिकित्सा शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
IIT Jodhpur में डॉ. दीपक मिश्रा के नेतृत्व में हो रहा शोध
IIT Jodhpur के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक मिश्रा के नेतृत्व में मेडिकल AI सिस्टम्स लैब इन तकनीकों पर शोध कर रही है।
इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी तकनीकें विकसित करना है, जो डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों के काम में मदद करें। इसके साथ ही मरीजों की जांच को बेहतर बनाने और मेडिकल छात्रों को आधुनिक तरीकों से प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
IIT Jodhpur का शोध: स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ेगा AI का इस्तेमाल?
IIT Jodhpur में चल रहा यह शोध बताता है कि AI और रोबोटिक्स का इस्तेमाल मेडिकल जांच से लेकर डॉक्टरों की ट्रेनिंग तक कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। हार्ट की अल्ट्रासाउंड जांच में रोबोट की मदद, स्कैन में फ्रैक्चर की पहचान और सिमुलेशन आधारित ट्रेनिंग जैसी तकनीकें भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती हैं।
हालांकि, इन तकनीकों को अस्पतालों में बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने से पहले उनकी सुरक्षा, सटीकता और प्रभाव का क्लिनिकल परीक्षण करना जरूरी होगा। फिलहाल, यह पहल मेडिकल क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की नई संभावनाएं खोल रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
IIT Jodhpur का रोबोट हार्ट की जांच में क्या करेगा?
रोबोट अल्ट्रासाउंड प्रोब को संभालेगा और AI उसे सही दिशा और स्थिति में रखने में मदद करेगा, ताकि दिल की जरूरी तस्वीरें आसानी से ली जा सकें।
क्या AI डॉक्टरों की जगह ले लेगा?
नहीं। शोधकर्ताओं के मुताबिक इन तकनीकों का मकसद डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि जांच और इलाज में उनके काम को आसान बनाना है।
यह शोध कौन कर रहा है?
IIT Jodhpur के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक मिश्रा के नेतृत्व में मेडिकल AI सिस्टम्स लैब (MAISys Lab) यह शोध कर रही है।
क्या यह तकनीक अभी अस्पतालों में मिल रही है?
नहीं। यह तकनीक अभी शोध के चरण में है। अस्पतालों में इस्तेमाल से पहले इसकी सुरक्षा और सटीकता का क्लिनिकल परीक्षण जरूरी होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। बताई गई तकनीकें अभी शोध के चरण में हैं। किसी भी जांच या इलाज के लिए अपने डॉक्टर की सलाह लें।
स्रोत: IIT Jodhpur, मेडिकल AI सिस्टम्स लैब · भारत सरकार का India Science, Technology & Innovation पोर्टल (परियोजना: AI-driven Robot-assisted Cardiac Ultrasound System)









