राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल 2026 को कैबिनेट से मंजूरी दिए जाने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। सरकार जहां इसे प्रदेश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे संविधान विरोधी और समाज को बांटने वाला कानून करार देते हुए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष का ऐलान कर दिया है।
क्या है डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल 2026?
यह विधेयक अशांत घोषित क्षेत्रों में संपत्ति की खरीद-फरोख्त, किराएदारी और निवास से जुड़े नियमों को सख्त बनाने का प्रावधान करता है। सरकार का दावा है कि इससे दंगाइयों, अवैध गतिविधियों और जनसंख्या असंतुलन के कथित षड्यंत्रों पर प्रभावी रोक लगेगी।
सरकार का पक्ष: सुरक्षा और संतुलन की दलील
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि यह कानून स्थायी निवासियों की संपत्तियों और किराएदारों के अधिकारों की रक्षा करेगा।
उन्होंने कहा यह बीजेपी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार है, जो राजस्थान की जान-माल की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। जनसंख्या असंतुलन और अवैध तरीकों से संपत्ति खरीदने जैसी गतिविधियों पर अब पूर्ण विराम लगेगा।
दिलावर ने इसे लंबे समय से लंबित और प्रदेश के हित में आवश्यक विधेयक बताया।
विपक्ष का हमला: संविधान और सामाजिक सौहार्द का सवाल
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस बिल पर तीखा विरोध जताया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह विधेयक नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला है और समाज में विभाजन को बढ़ावा देगा।
टीकाराम जूली ने चेतावनी देते हुए कहा कांग्रेस इस संविधान विरोधी और समाज विरोधी बिल का विधानसभा के अंदर और बाहर पुरजोर विरोध करेगी। हम सड़क से सदन तक भाजपा के असली चेहरे को जनता के सामने लाएंगे।
अब सबकी निगाहें आगामी विधानसभा सत्र पर टिकी हैं, जहां यह विधेयक पेश किया जाएगा। सवाल यह है कि क्या सरकार इसे बिना संशोधन के पारित करा पाएगी या विपक्ष का विरोध इसे राजनीतिक और कानूनी उलझनों में फंसा देगा?
राजस्थान की राजनीति में यह विधेयक आने वाले दिनों में बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।











