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OMR घोटाले पर अशोक गहलोत का बड़ा हमला: “35 लाख युवाओं के भविष्य से खिलवाड़?”, भजनलाल सरकार से दो साल की परीक्षाओं की जांच की मांग

राजस्थान में ओएमआर शीट बदलने के सनसनीखेज खुलासे के बाद सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले को लेकर भजनलाल सरकार की घेराबंदी और आक्रामक कर दी है। गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए गहलोत ने दावा किया कि ओएमआर घोटाले में पकड़े गए कर्मचारी 2024 और 2025 की परीक्षाओं के दौरान भी बोर्ड में तैनात थे। ऐसे में पिछले दो वर्षों में हुई लगभग सभी बड़ी भर्तियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

35 लाख युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हुआ?
अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में पिछले दो साल में आयोजित प्रमुख परीक्षाओं की सूची गिनाते हुए कहा कि 35 लाख से अधिक अभ्यर्थी इन भर्तियों में शामिल हुए थे। इनमें—

* CET (स्नातक व सीनियर सेकेंडरी)
* पशु परिचर
* कनिष्ठ लेखाकार (Junior Accountant)
* LDC
* पटवारी
* ग्राम विकास अधिकारी (VDO)
* संगणक

जैसी अहम परीक्षाएं शामिल हैं।
गहलोत का कहना है कि इन परीक्षाओं में असामान्य रूप से ऊंची कट-ऑफ पहले ही संदेह पैदा कर रही थी, जो अब ओएमआर घोटाले के खुलासे के बाद सच साबित होती दिख रही है।

भजनलाल सरकार पर राजनीति करने का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मामले में न्याय के बजाय राजनीति कर रही है। गहलोत ने कहा सरकार केवल कांग्रेस शासनकाल की परीक्षाओं को कटघरे में खड़ा कर रही है, जबकि 2024-25 में भी वही दागी स्टाफ सक्रिय था। मुख्यमंत्री को चाहिए कि पिछले दो साल की हर परीक्षा की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

जीरो नंबर वाले बने टॉपर, OMR ही बदल दी गई
SOG की जांच में सामने आया है कि एक संगठित गिरोह ने 2018 की भर्तियों में ऐसा खेल किया कि फेल होने वाले अभ्यर्थी सीधे मेरिट लिस्ट में पहुंच गए। एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार—

* 6 नंबर पाने वाले अभ्यर्थी को 259 अंक
* 2 नंबर वाले को 225 अंक
* 30 नंबर वाले को 185 अंक

देकर टॉपर बना दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि 38 अभ्यर्थियों की मूल OMR शीट ही बदल दी गई।

लखनऊ STF से खुली साजिश की पहली परत
इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा सबसे पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ, जहां STF ने 60 लाख रुपये नकद ले जा रहे आरोपियों को पकड़ा। इसके बाद जनवरी 2025 में राजस्थान SOG ने एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान बोर्ड के टेक्निकल हेड और प्रोग्रामर समेत कई अहम लोगों की भूमिका उजागर हुई।

RSSB के टेक्निकल हेड समेत 5 आरोपी गिरफ्तार
अब तक इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है—

* राघव लिमिटेड कंपनी के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़ और शदान खान
* राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के टेक्निकल हेड संजय माथुर
* प्रोग्रामर प्रदीप गंगवाल
* एक अभ्यर्थी पूनम

SOG की जांच में सामने आया है कि OMR स्कैनिंग की जिम्मेदारी संभालने के दौरान बड़े स्तर पर डेटा में हेरफेर किया गया।

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