हार्ट, लिवर या फेफड़ों का ट्रांसप्लांट कराना किसी भी आम परिवार के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती होता है। इस इलाज में लाखों रुपये खर्च हो सकते हैं, जिससे कई परिवारों के लिए इलाज का इंतजाम करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मरीजों को राहत देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार एक प्रस्ताव पर काम कर रही है। इसके तहत हार्ट, लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट को Ayushman Yojana यानी आयुष्मान भारत निरामयम योजना में शामिल करने की तैयारी है। इसके अलावा, ट्रांसप्लांट के लिए कवरेज को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी इस प्रस्ताव पर काम चल रहा है और इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
ट्रांसप्लांट के लिए बनेंगे अलग-अलग पैकेज
महंगे अंग प्रत्यारोपण को योजना में शामिल करने के लिए डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है। इसमें AIIMS और दूसरे चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह समिति हार्ट, लिवर और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट पर होने वाले कुल खर्च का आकलन कर रही है।
इस आकलन में केवल ऑपरेशन का खर्च ही नहीं, बल्कि सर्जरी से पहले होने वाली जांच, ICU में भर्ती, दवाइयां और ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की देखभाल पर आने वाला खर्च भी शामिल होगा। समिति की रिपोर्ट के आधार पर इलाज के पैकेज और कवरेज की सीमा तय करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
इस दिशा में चर्चा पहले से चल रही है। मई 2026 में उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने AIIMS भोपाल के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में ट्रांसप्लांट सेवाओं को मजबूत करने और Ayushman Yojana के तहत हार्ट और लंग्स ट्रांसप्लांट जोड़ने पर विचार किया था।
मध्य प्रदेश में अंग प्रत्यारोपण की संख्या कम
राज्य में अंग प्रत्यारोपण की संख्या बढ़ाना भी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में देशभर में रिकॉर्ड 20,138 अंग प्रत्यारोपण हुए। इतने बड़े आंकड़े के मुकाबले मध्य प्रदेश में प्रत्यारोपण, खासकर मृत व्यक्तियों से होने वाले अंगदान के मामले अब भी काफी कम हैं।
ऐसे में सरकार का जोर सिर्फ मरीजों को इलाज के लिए आर्थिक मदद देने पर नहीं, बल्कि अंगदान को बढ़ावा देने और ट्रांसप्लांट से जुड़ी पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी है।
हार्ट, लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट पर कितना खर्च आता है?
अंग प्रत्यारोपण का खर्च अस्पताल, मरीज की स्थिति और इलाज की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। अनुमानित खर्च पर नजर डालें तो सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच काफी अंतर दिखाई देता है।
- किडनी ट्रांसप्लांट: सरकारी अस्पतालों में करीब 3 से 5.5 लाख रुपये, जबकि निजी अस्पतालों में 15 से 20 लाख रुपये तक।
- लिवर ट्रांसप्लांट: सरकारी अस्पतालों में करीब 8 से 12 लाख रुपये और निजी अस्पतालों में 30 से 35 लाख रुपये तक।
- हार्ट ट्रांसप्लांट: सरकारी अस्पतालों में करीब 10 लाख रुपये और निजी अस्पतालों में 40 से 50 लाख रुपये तक।
- लंग्स ट्रांसप्लांट: सरकारी अस्पतालों में करीब 10 से 15 लाख रुपये और निजी अस्पतालों में 60 से 70 लाख रुपये तक।
ये आंकड़े अनुमानित हैं। वास्तविक खर्च अस्पताल, मरीज की मेडिकल स्थिति और ट्रांसप्लांट के बाद जरूरी देखभाल के आधार पर कम या ज्यादा हो सकता है।
कैंसर के इलाज की कवरेज बढ़ाने की भी जरूरत
अंग प्रत्यारोपण के साथ कैंसर के इलाज की कवरेज को लेकर भी बदलाव की जरूरत बताई जा रही है। पूर्व NHM निदेशक डॉ. पंकज शुक्ला के मुताबिक, कैंसर का इलाज सिर्फ कीमोथेरेपी या रेडिएशन तक सीमित नहीं होता। मरीज को कई तरह की जांच, सर्जरी, अलग-अलग थेरेपी और लंबे समय तक नियमित जांच की जरूरत पड़ सकती है।
उनका सुझाव है कि मरीजों को इलाज के हर चरण के लिए अलग-अलग मंजूरी लेने के बजाय पूरे उपचार को एक साथ कवरेज में शामिल किया जाना चाहिए। इससे मरीजों और उनके परिवारों को बार-बार होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है और इलाज पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम हो सकता है।
अलग-अलग मंजूरी से मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है
कैंसर के इलाज में कई प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग मंजूरी और तय पैकेज की सीमाएं मरीजों के सामने मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। इसलिए मांग की जा रही है कि इलाज के किसी एक हिस्से के बजाय पूरी प्रक्रिया को ध्यान में रखकर कवरेज तय की जाए।
संसद में दिए गए केंद्र सरकार के जवाब के मुताबिक, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) में 27 मेडिकल स्पेशलिटी के तहत 1,961 प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनमें कैंसर (ऑन्कोलॉजी) भी एक स्पेशलिटी है।
अंगदान बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को दी जाएगी ट्रेनिंग
मध्य प्रदेश सरकार अंगदान को बढ़ावा देने के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी तैयारी कर रही है। इस काम में AIIMS भोपाल सहयोग करेगा।
प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को ब्रेन डेथ की पहचान और प्रमाणन, संभावित अंगदाताओं की समय पर पहचान, उनके परिवार की सहमति लेने और अंगों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा। इसके अलावा, अंगों को ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर ग्रीन कॉरिडोर के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी, ताकि अंगों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
Ayushman Yojana: मरीजों को कब मिलेगी राहत?
मध्य प्रदेश सरकार की इस पहल का मकसद महंगे इलाज को आम लोगों की पहुंच में लाना और राज्य में अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था को मजबूत करना है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो Ayushman Yojana के पात्र मरीजों को हार्ट, लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट के खर्च में राहत मिल सकती है।
हालांकि, अभी इलाज के पैकेज, पात्रता और कवरेज से जुड़ी शर्तें तय होनी बाकी हैं। इसलिए फिलहाल इसे लागू योजना नहीं, बल्कि प्रस्तावित बदलाव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या अभी Ayushman Yojana में हार्ट और लिवर ट्रांसप्लांट मुफ्त है?
मध्य प्रदेश में अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है। सरकार की अंतिम मंजूरी और पैकेज तय होने के बाद ही यह लागू होगा।
कवरेज 5 लाख से 10 लाख कब होगा?
Ayushman Yojana में ट्रांसप्लांट के लिए कवरेज 10 लाख रुपये करने पर विचार चल रहा है। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और सरकार की मंजूरी के बाद ही इसकी तारीख तय होगी।
भारत में लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च कितना है?
अनुमान के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में करीब 8 से 12 लाख रुपये और निजी अस्पतालों में 30 से 35 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है।
2025 में भारत में कितने अंग प्रत्यारोपण हुए?
NOTTO के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में देश में रिकॉर्ड 20,138 अंग प्रत्यारोपण हुए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। योजना में कोई बदलाव आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही लागू होगा। इलाज और पात्रता से जुड़ी सही जानकारी के लिए अपने डॉक्टर या आयुष्मान हेल्प डेस्क से संपर्क करें।
स्रोत: मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग · NOTTO, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (अंग प्रत्यारोपण आंकड़े 2025) · लोकसभा में स्वास्थ्य मंत्रालय का लिखित जवाब (PM-JAY प्रक्रियाएं)








