New Delhi राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने गुरुवार को लोक सभा में औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक 2026 पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कर्मचारी, कारखाना कर्मी, संविदा श्रमिक, गिग वर्कर व संविदा कार्मिको की पीड़ा को सदन में रखा,सांसद ने सदन में कहा कि यह सच है कि यह विधेयक तकनीकी संशोधन के नाम पर श्रमिक अधिकारों को और कमजोर करने की दिशा में एक और कदम है,उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि यह “स्पष्टता” के लिए है , लेकिन वास्तविकता यह है कि इससे उद्योगपतियों को सुविधा और मजदूरों को असुरक्षा मिलेग क्योंकि यह विधेयक वास्तव में अच्छा होता तो देशभर की ट्रेड यूनियनें इसका विरोध क्यों करती |
संवैधानिक अनुच्छेदों की अवेहलना कर रही है सरकार
सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोक सभा में इस विधेयक के विरोध में बोलते हुए कहा कि ऐसा कानून लाकर सरकार अनुच्छेद 14 ,तथा
अनुच्छेद 19(1) (सी) व अनुच्छेद 21 की अवहेलना कर रही है,बेनीवाल ने कहा कि संविधान के जो आर्टिकल श्रमिकों को समानता का अधिकार देते है उसकी परिभाषा संकुचित कर दी जाती है और बड़ी संख्या में कामगार कानूनी सुरक्षा से बाहर हो जाते हैं, तो यह समानता के सिद्धांत पर प्रश्न उठाता है वहीं हड़ताल करने व ट्रेड यूनियन बना को भी सांसद ने मजदूरों का मौलिक अधिकार बताया | सांसद ने कहा कि यदि हड़ताल के लिए कठोर पूर्व-शर्तें, नोटिस अवधि और दंडात्मक प्रावधान अत्यधिक कड़े किए जाते हैं, तो यह इस अधिकार को व्यवहार में निष्प्रभावी बना देता है क्योंकि हड़ताल करने का अधिकार “मजदूर का हथियार” माना जाता है ,सांसद ने आर्टिकल 21 के संदर्भ में बोलते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनेक निर्णयों में कहा है कि “जीवन” का अर्थ केवल अस्तित्व नहीं, बल्कि गरिमापूर्ण जीवन है। नौकरी की असुरक्षा, मनमानी छंटनी और विवाद निवारण में देरी ,यह गरिमा के अधिकार को प्रभावित करते हैं। इसलिए सरकार यह विधेयक लाकर संविधान की मूल भावना और इन अनुच्छेदों की अवमानना कर रही है | उन्होंने राज्यों के डायरेक्टिव प्रिंसिपल पर बोलते हुए कहा कि आर्टिकल 38 -जो सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय की बात करता है,
आर्टिकल 39- जो आजीविका के साधनो की सुरक्षा की बात करता है तथा आर्टकिल 43 A – जो उद्योगों में श्रमिकों की भागीदारी की बात करता है उसकी अवमानना भी सरकार का रही है क्योंकि यह आर्टिकल केवल सजावटी शब्द नहीं ,शासन की दिशा तय करते है बेनीवाल ने कहा कि सरकार के ऐसे निर्णय से कई श्रमिक समूह अब अपने बुनियादी अधिकारों जैसे सामूहिक सौदेबाजी, उचित वेतन, संरक्षित नौकरी और हड़ताल के अधिकार को खोते हुए महसूस कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि वो केवल राजनीतिक मतभेद व्यक्त नहीं कर रहा है बल्कि संविधान की उस व्याख्या की ओर सदन का ध्यान आकर्षित कर रहे है जिसके संदर्भ में स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर स्पष्ट किया है |
राजस्थान में श्रम विभाग में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान के उद्योगों में ,सीमेंट फैक्ट्रियों , रिफायनरी जैसे क्षेत्रो में मजदूरों के हितों की अवहेलना से जुड़े कई मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं और कई बार मजदूरों की मृत्यु हो जाती है और सामान्य वार्ता से कोई भी फैक्ट्री वाला उस मृतक के परिजनों की मदद नहीं करता ऐसे में आंदोलन और हड़ताल से ही वो झुकते है, सांसद ने कहा कि श्रम कानूनों में सुधार, श्रमिक पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ और सिलिकोसिस नीति सरकार द्वारा लागू की गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है, सबसे ज्यादा भ्र्ष्टाचार श्रम विभाग के कार्यालयों में व्यापत है |
हम सुधार के विरोधी नहीं मगर श्रमिक विरोधी कानून को स्वीकार नहीं करेंगे
सांसद ने कहा कि हम उद्योग विरोधी नहीं हैं,हम निवेश विरोधी नहीं हैं,हम सुधार विरोधी नहीं हैं।
लेकिन हम श्रमिक विरोधी कानून स्वीकार नहीं कर सकते,उन्होंने विधेयक पर बोलते हुए कहा कि
भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ,मजदूर, कर्मचारी, कारखाना कर्मी, संविदा श्रमिक, गिग वर्कर इनके अधिकारों की रक्षा करना इस सदन का कर्तव्य है और कोई भी विकास तभी सार्थक है जब वह न्यायपूर्ण हो ,विकास तभी स्थायी है जब वह समावेशी हो |
स्थानीय लोगो को रोजगार में प्राथमिकता देने की रखी मांग सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि
ट्रेड यूनियनों, उद्योग संगठनों और राज्य सरकारों के साथ व्यापक परामर्श करके और हड़ताल और सामूहिक सौदेबाजी से जुड़े प्रावधानों में संतुलन लाकर तथा
औद्योगिक न्यायाधिकरणों की समयबद्ध स्थापना सुनिश्चित करके ही इस कानून को लागू किया जाए वही सीमेंट, रिफायनरी सहित उद्योगों में 80 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगो को प्राथमिकता देने के नियम बनाए जाए वहीं नागौर में तीन डॉक्टरों की ईएसआईसी डिस्पेंसरी का प्रस्ताव जो लंबित पड़ा है उसे जल्द से जल्द स्वीकृत किया जाये साथ ही संविदा कार्मिको के भविष्य पर सरकार को गंभीरता से मंथन करते हुए उन्हें नियमित करने की दिशा में कार्य किया जाए |
संसद में मजदूर और बेरोजगारों के हितों पर बोलते हुए सांसद बेनीवाल ने उद्योगों में 80 प्रतिशत स्थानीय लोगो को रोजगार देने की नीति बनाने की उठाई मांग









