राजस्थान के झुंझुनूं जिले में अवैध खनन ग्रामीण जीवन, पर्यावरण और जनसुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है। ग्राम हुकुमपुरा, बामलास, खेदड़ों की ढाणी एवं खरबासों की ढाणी के ग्रामीण पिछले कई दिनों से अवैध खनन के खिलाफ शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं। यह आंदोलन अब अपने 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई या सकारात्मक पहल देखने को नहीं मिली है। ग्रामीण अपने हक, अपने घरों की सुरक्षा और प्रकृति के संरक्षण के लिए एकजुट होकर संघर्ष कर रहे हैं।
27वें दिन भी जारी रहा धरना, सद्बुद्धि यज्ञ एवं हर घर तिरंगा अभियान की शुरुआत
धरने के 27वें दिन ग्रामीणों ने झुंझुनूं जिला प्रशासन को जागृत करने के उद्देश्य से सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ के माध्यम से सरकार और प्रशासन से यह प्रार्थना की गई कि वे ग्रामीणों की जायज मांगों पर गंभीरता से ध्यान दें। धरनार्थी एवं अधिवक्ता जयंत मूण्ड ने बताया कि अवैध खनन के कारण बड़े स्तर पर ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे सैकड़ों मकानों में दरारें आ चुकी हैं तथा कई कुओं और संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ है।

इसी अवसर पर ग्रामीणों ने हर घर तिरंगा अभियान की भी शुरुआत की, जिससे यह संदेश दिया गया कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और राष्ट्रहित में है। पिछले 27 दिनों में संघर्ष समिति द्वारा सक्षम अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को अनेक ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक किसी ने भी इस गंभीर समस्या की सुध नहीं ली है।
प्रशासनिक साठ-गांठ और अरावली का विनाश
धरनार्थियों का आरोप है कि झुंझुनूं जिले में प्रशासनिक साठ-गांठ के चलते अरावली पर्वतमाला में बड़े स्तर पर अवैध खनन किया जा रहा है। एक ओर सरकार हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण और पेड़ बचाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण ठंड में खुले आसमान के नीचे न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पूर्व सरपंच दारासिंह मेघवंशी ने कहा कि यदि ग्रामीण गलत हैं तो प्रशासन स्पष्ट रूप से जांच कर सच्चाई सामने लाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खनन लीज से संबंधित दस्तावेज मांगने के बावजूद प्रशासन न तो कोई कागजात उपलब्ध करा रहा है और न ही किसी प्रकार की वार्ता कर रहा है।
जनसमर्थन और एकजुटता
इस धरने को क्षेत्र के अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक व्यक्तियों का समर्थन प्राप्त हो रहा है। धरने में पूर्व जिला परिषद सदस्य मूलचंद खरीटा, कैप्टन विनोद सांखला, मीणा सेना के सुरेश मीणा, प्रदीप यादव (बामलास), लीलाधर मीणा, पवन शर्मा, रामू राम सोहू, शेरा, सुरेन्द्र शेखावत सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। यह एकजुटता इस आंदोलन की मजबूती और गंभीरता को दर्शाती है।









