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कांग्रेस ने लगाए भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, कांग्रेसी नेताओं ने बीजेपी के खिलाफ खोला मोर्चा

राजस्थान में हर बार कुछ ना कुछ नया देखने को मिलता हैं और राजस्थान की राजनीति में भी कुछ ना कुछ देखने को मिलता हैं। हालहि में SIR का मामला शांत ही हुआ था की राजस्थान में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग पर फिर से गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने दावा किया है कि राजस्थान SIR फर्जीवाड़ा लोकतंत्र को कमजोर करने और विपक्षी मतदाताओं के नाम काटने की एक सुनियोजित साजिश है। इस मुद्दे पर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा पर तीखा हमला बोला।

गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि एसआईआर के बाद जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 45 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत की श्रेणी में डाल दिया गया है। इसके बाद 15 जनवरी तक आपत्तियां मांगी गईं, लेकिन पूरी प्रक्रिया संदिग्ध और पक्षपातपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि तीन जनवरी तक एसआईआर प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष के राजस्थान दौरे के बाद अचानक बड़े पैमाने पर नाम जोड़ने और काटने का खेल शुरू हो गया।

डोटासरा ने चुनाव आयोग की वेबसाइट के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 17 दिसंबर से 14 जनवरी के बीच भाजपा के 937 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ने 211 नाम जोड़ने और 5,694 नाम काटने के आवेदन दिए, जबकि कांग्रेस के 110 बीएलए ने केवल 185 नाम जोड़ने और दो नाम हटाने के आवेदन दिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस के बीएलए नाम नहीं कटवा रहे थे, तो भाजपा के बीएलए इतनी बड़ी संख्या में नाम कैसे कटवा रहे थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह के राजस्थान दौरे के दौरान 3 से 13 जनवरी के बीच गुप्त रूप से नाम काटने की प्रक्रिया को तेज किया गया। हर विधानसभा क्षेत्र में 10 से 15 हजार फर्जी कंप्यूटरीकृत फॉर्म छपवाए गए, जिन पर बीएलए के जाली हस्ताक्षर किए गए। 13, 14 और 15 जनवरी को हर विधानसभा क्षेत्र में हजारों फॉर्म जमा कर नाम काटे गए, खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां कांग्रेस ने चुनाव जीते थे। डोटासरा ने इसे सीधे तौर पर राजस्थान SIR फर्जीवाड़ा करार दिया।

डोटासरा ने कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद एक बीएलए एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म ही जमा कर सकता है, लेकिन इसके बावजूद हजारों फॉर्म स्वीकार किए गए। कई भाजपा बीएलए मीडिया के सामने आकर कह चुके हैं कि उन्होंने ऐसे फॉर्म जमा ही नहीं किए और उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारियों पर दबाव बनाया गया, उन्हें डराया-धमकाया गया और जो अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे थे, उनके तबादले कर दिए गए। डोटासरा ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े मतदाताओं के नाम काटने का प्रयास कर रहे हैं।

इस मौके पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि यदि भाजपा इसी तरह लोकतंत्र पर हमला करती रही, तो चुनाव कराने का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राजस्थान में एसआईआर नहीं, बल्कि “सीवीआर — कांग्रेस वोटर रिमूवल” चल रहा है।

जूली ने मांग की कि राज्य में जमा हुए सभी फॉर्मों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि ये फॉर्म कहां छपे, किसने छपवाए और कैसे सहायक रिटर्निंग अधिकारियों के कार्यालयों तक पहुंचे। उन्होंने चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि राजस्थान SIR फर्जीवाड़ा नहीं रोका गया, तो पार्टी इसे लेकर सड़कों से लेकर न्यायालय तक संघर्ष करेगी।

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