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कांग्रेस के नेताओं को राजनीतिक प्रशिक्षण की सख्त आवश्यकता: मदन राठौड़

धारीवाल द्वारा सदन में घृणित और अशोभनीय शब्द का प्रयोग करना कांग्रेस की गिरती हुई राजनीतिक संस्कृति और मानसिक दिवालियापन : मदन राठौड़
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जयपुर। राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा सदन में की जा रही अमर्यादित टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उनके बयानों की कड़ी निंदा की है। राठौड़ ने रवनीत सिंह बिट्टू के बारे में राहुल गांधी के बयान पर कहा कि सिख समाज ने देश की आज़ादी से लेकर आज तक राष्ट्र की आन, बान और शान की रक्षा के लिए असंख्य बलिदान दिए हैं। ऐसे गौरवशाली समाज के सांसद और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के लिए “गद्दार” जैसे शब्दों का प्रयोग करना अत्यंत शर्मनाक, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। यह बयान न केवल एक जनप्रतिनिधि बल्कि पूरे सिख समाज का अपमान है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह कांग्रेस की गिरती हुई राजनीतिक संस्कृति और उनके संस्कारों को उजागर करता है। लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले सदन में इस तरह की भाषा अस्वीकार्य है और देश की जनता का अपमान है। जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे शब्दों की मर्यादा रखें और स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करें, लेकिन राहुल गांधी बार-बार अपने आचरण से यह साबित कर रहे हैं कि उन्हें न तो सदन की गरिमा की चिंता है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गोविंद सिंह डोटासरा को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें सदन की गरिमा और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व जिस तरह से अपशब्दों और अनर्गल आरोपों की राजनीति कर रहा है, उससे स्पष्ट है कि पार्टी हताशा और निराशा में दिशाहीन हो चुकी है। राठौड़ ने मांग की कि राहुल गांधी और डोटासरा देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें तथा भविष्य में संयमित और जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करें। भाजपा ऐसे किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध करेगी जो समाज को बांटने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तोड़ने का काम करता हो।

राठौड़ ने राजस्थान विधानसभा में डोटासरा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सदन में अडानी के नाम पर केवल नौटंकी कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें पहले अपने ही दल की सरकारों के कार्यकाल का सच स्वीकार करना चाहिए। कांग्रेस की तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में अडानी समूह की शान में कसीदे पढ़े जाते थे और हजारों बीघा जमीन अडानी को देने का काम किया गया तब तो अडानी अच्छे लगते थे। गहलोत सरकार द्वारा करीब 85 हजार बीघा भूमि अडानी समूह को आवंटित की गई, जिसके प्रमाण आज भी मौजूद हैं। उस समय कांग्रेस सरकार के मंत्री और नेता अडानी के सम्मान में हाथ बांधे खड़े नजर आते थे। आज वही कांग्रेस नेता अडानी का नाम लेकर दिखावटी विरोध कर रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि भाजपा तथ्यों और पारदर्शिता की राजनीति करती है, जबकि कांग्रेस झूठ, भ्रम और दिखावे की राजनीति करती है। जनता सब समझती है और समय आने पर कांग्रेस को इसका करारा जवाब देगी।
पूर्व मंत्री धारीवाल की ओर से बुधवार को दिए बयान पर राठौड़ ने कहा कि सदन में घृणित और अशोभनीय शब्द का प्रयोग करना कांग्रेस की गिरती हुई राजनीतिक संस्कृति और मानसिक दिवालियापन को उजागर करता है। सदन जैसे गरिमामय मंच पर इस प्रकार की भाषा अस्वीकार्य है और यह लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को तत्काल धारीवाल के इस आचरण पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए तथा प्रदेशवासियों और सदन से सार्वजनिक रूप से माफी मंगवानी चाहिए, अन्यथा यह स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस इस तरह की अभद्रता को संरक्षण दे रही है। राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को राजनीतिक प्रशिक्षण की सख्त आवश्यकता है। कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है कि पूरे कुएं में ही भांग पड़ी हुई है। ऐसा लगता है कि अभद्र भाषा और अमर्यादित आचरण कांग्रेस की कार्यसंस्कृति बन चुका है।

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